सरिस्का टाइगर रिजर्व के बारे में रोचक तथ्य | Interesting Facts About Sariska Tiger Reserve in Hindi

सरिस्का टाइगर रिजर्व, भारत के राजस्थान राज्य के अलवर जिलें में स्थित हैं। Interesting Facts About Sariska Tiger Reserve: यह टाइगर रिजर्व 881 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें झाड़ी दार कांटेदार जंगल, शुष्क पर्णपाती वन, घास के मैदान और चट्टानी पहाड़िया शामिल है। पूर्वकाल में यह क्षेत्र अलवर राज्य का शिकार संरक्षित क्षेत्र था। 1958 में इस क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था और बाद में 1978 में भारत के प्रोजेक्ट टाइगर का हिसाब बनाते हुए इस क्षेत्र को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था।

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Interesting Facts About Sariska Tiger Reserve

सरिस्का टाइगर रिजर्व को 273.8 वर्ग किलोमीटर के कुल क्षेत्रफल के साथ 1982 में नेशनल पार्क घोषित किया गया था। यह टाइगर रिजर्व दुनिया का पहला टाइगर रिजर्व है जहां सफलतापूर्वक बाघों को स्थानांतरित किया गया है। यह उत्तरी अरावली वन्यजीव गलियारे में एक महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्र है।

सरिस्का टाइगर रिजर्व हिंडौन से 106 किलोमीटर, जयपुर से 107 किलोमीटर और राजधानी दिल्ली से 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह क्षेत्र अरावली रेंज और खथियार-गिर के शुष्क पर्णपाती वन क्षेत्र का एक हिस्सा है। यह क्षेत्र तांबा जैसे खनिज संसाधनों में समृद्ध है। इस क्षेत्र में खनन पर सुप्रीम कोर्ट में 1991 के प्रतिबंध के बावजूद, संगमरमर के खनन से पर्यावरण को खतरा बना हुआ है।

सरिस्का टाइगर रिजर्व के बारे में संक्षिप्त जानकारी

  • सरिस्का टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 881 वर्ग किलोमीटर है।
  • 1973 में इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था।
  • सरिस्का टाइगर रिजर्व समुद्र तल से 300 से 722 मीटर ऊंचाई के बीच स्थित है।
  • सरिस्का टाइगर रिजर्व क्षेत्र में प्रति वर्ष औसतन 700 मिलीमीटर बारिश होती है।
  • वन प्रकार : उष्णकटिबंधीय, शुष्क, पर्णपाती, और उष्णकटिबंधीय कांटा

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सरिस्का टाइगर रिजर्व में पाए जाने वाले वनस्पतियां

सरिस्का टाइगर रिजर्व के जंगलों में पाए जाने वाले मुख्य वृक्ष ढोक ( एनोगेसस पेंडूला ) हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र में पाए जाने वाले अन्य पेड़ इस प्रकार है। सालार ( बोसवेलिया सेराता ), कदया ( स्टरकुलिया युरेन्स ), ढाक ( ब्यूटीमा मोनोस्पर्मा ), गोल ( लैनिया कोरोमैंडेलिका ), बेर ( जीजीफस मारिटियाना ), खैर ( बबूल केचु ), बरगद ( फिकस बेंघालेसीस ), अर्जुन ( टर्मिनलिया अर्जुन), गूगल ( कॉमिफोरा वाइटी ), बांस

सरिस्का टाइगर रिजर्व में वन्यजीव

सरिस्का टाइगर रिजर्व वन्यजीवों में भी समृद्ध है। इस टाइगर रिजर्व में लुप्तप्राय बंगाल टाइगर के अलावा कई प्रकार के वन्यजीव और पक्षी पाए जाते हैं। जैसे कि बाघ, तेंदुआ, जंगली बिल्ली, काराकाल, धारीदार लकड़बग्घा, सुनहरा सियार, चीतल, सांभर हिरण, नीलगाय, जंगली सूअर, भारतीय सिवेट, जावन नेवला, सुर्ख नेवला, रिसस मकाक लंगूरखरगोश ।

सरिस्का टाइगर रिजर्व में विभिन्न प्रजातियों के पंछी भी पाए जाते हैं। जैसे कि ग्रे पार्टिज, सफेद गले वाला किंगफिशर, भारतीय मोर, बुश बटेर, सैंडग्राऊस, ट्रिपी, गोल्डन बॉक्स कठफोड़वा, क्रस्टेड सरपेंट ईगल, उल्लू आदि हैं।

सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या

2003 में, सरिस्का टाइगर रिजर्व में 16 बाघ रहते थे। लेकिन 2004 में, यह बताया गया था कि रिजर्व में कोई बाघ नहीं देखा गया था और यह भी बताया गया कि बाघों की उपस्थिति का कोई अप्रत्यक्ष सबूत नहीं मिला था। जैसे कि बाघों की पग की निशान, पेड़ों पार्क खरोच के निशान आदि।

राजस्थान के वन विभाग ने बताया कि, बाघ अस्थाई रूप से रिजर्व से बाहर चले गए होंगे, और मानसून के मौसम में वापस चले आएंगे, प्रोजेक्ट टाइगर के स्टाफ ने भी इस धारणा को समर्थन किया लेकिन मानसून के बाद भी बाघों की आता पता ना होने के बाद 2005 जनवरी में यह बताया गया कि सरिस्का टाइगर रिजर्व में कोई बात नहीं बचा है।

उसके बाद जुलाई 2008 में, रणथंभौर नेशनल पार्क से दो बाघों को सरिस्का टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया था। 1 साल बाद फरवरी 2009 में एक और मादा बाघ को सरिस्का टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया।

2012 में, सरिस्का टाइगर रिजर्व में मादा बाघ के साथ दो शावक भी दिखाई दिए, फिर 2014 में, दो और शावक दिखाई दिए, इसके साथ सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 11 पहुंच गए थे।

अक्टूबर 2018 तक, सरिस्का टाइगर रिजर्व में 5 शावको सहित 18 बाघ थे, 2020 तक टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।

सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों का स्थानांतरण

2005 में, राजस्थान राज्य सरकार, भारत सरकार और भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से सरिस्का टाइगर रिजर्व में फिर से बाघों का स्थानांतरण और टाइगर रिजर्व के अंदर के गांवों की पुनर्वास की योजना बनाई गई। बाईपास के निर्माण की योजना पर भी चर्चा की गई। अंततः रणथंभौर नेशनल पार्क से एक नर और दो मादा बाघ को स्थानांतरण करने का निर्णय लिया गया।

28 जून 2008 को, रणथंभौर नेशनल पार्क से सरिस्का टाइगर रिजर्व तक हेलीकॉप्टर द्वारा एक नर बाघ को स्थानांतरण किया गया। फरवरी 2009 में रणथंभौर नेशनल पार्क से एक मादा बाघ को सरिस्का टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया फिर 28 जुलाई 2010 को रणथंबोर नेशनल पार्क से सरिस्का टाइगर रिजर्व में एक और बाघिन को स्थानांतरित किया गया।

इन सभी बाघों को मॉनिटर करने के लिए ट्रैकिंग कॉलर लगाया गया था, भारतीय वन्यजीव संस्थान ने राजस्थान सरकार के साथ मिलकर इसरो के टोही उपग्रहों की मदद से इन बाघों को ट्रैक करने लगा।

हालांकि, पहले स्थानांतरित किए गए बाघ की जहर के कारण मृत्यु हो गई। सरिस्का टाइगर रिजर्व क्षेत्र के 4 गांवों में से केवल 2 गांव को ही स्थानांतरित कर दिया गया था, जबकि दूसरे गांव कांकवारी को बाघ के स्थानांतरण के लंबे समय के बाद स्थानांतरित किया गया। लेकिन राज्य पर्यटन विभाग द्वारा का कांकवारी किले का जीर्णोद्धार किया गया, जो संभवत: वन्य जीव संरक्षण मानदंडों का उल्लंघन कर सकता है।

इस क्षेत्र से स्थानांतरित पहला गांव भगिनी था। इसके बाद सरिस्का टाइगर रिजर्व के लिए एक और भी मुस्किले हैं, और वह हैं इस रिज़र्व को पार करने वाली सड़कों का डायवर्जन, जो इसके वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और यह आज भी समस्या बनी हुई है।

नाम सरिस्का टाइगर रिजर्व
स्थापना1958 वन्यजीव अभयारण्य घोषित,
1978 टाइगर रिजर्व घोषित
1982 नेशनल पार्क घोषित
राज्य राजस्थान
ज़िल्ला अलवर
कुल क्षेत्रफल 881 वर्ग किलोमीटर
वनस्पति सालार ( बोसवेलिया सेराता ), कदया ( स्टरकुलिया युरेन्स ), ढाक ( ब्यूटीमा मोनोस्पर्मा ), गोल ( लैनिया कोरोमैंडेलिका ), बेर ( जीजीफस मारिटियाना ), खैर ( बबूल केचु ), बरगद ( फिकस बेंघालेसीस ), अर्जुन ( टर्मिनलिया अर्जुन), गूगल ( कॉमिफोरा वाइटी ), बांस
वन्य जीव बाघ, तेंदुआ, जंगली बिल्ली, काराकाल, धारीदार लकड़बग्घा, सुनहरा सियार, चीतल, सांभर हिरण, नीलगाय, जंगली सूअर, भारतीय सिवेट, जावन नेवला, सुर्ख नेवला, रिसस मकाक लंगूरखरगोश
पंछी
ऊंचाई सरिस्का टाइगर रिजर्व समुद्र तल से 300 से 722 मीटर ऊंचाई के बीच स्थित है।
सफारी का समयसुबह 6:00 बजे से 9:30 बजे तक और दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक,
होटल
नजदीकी पर्यटक स्थल

सरिस्का टाइगर रिजर्व सफारी

सरिस्का टाइगर रिजर्व में, जीप सफारी द्वारा केवल कांकवारी किले तक पंहुचा जा सकता है, अन्य जानवरों और दुर्लभ पक्षियों को देखने के लिए कैटर सफारी उत्तम होता है।

  • सरिस्का टाइगर रिजर्व सफारी को दिन के दौरान दो स्लॉट में व्यवस्थित किया गया है, सुबह 6:00 बजे से 9:30 बजे तक और दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक, आप अपनी सुविधा के अनुसार सुबह या शाम के स्लॉट को चुन सकते हैं।
  • सरिस्का टाइगर रिजर्व की यात्रा करने से पहले अपनी बुकिंग की पुष्टि कर ले क्योंकि मौसम के अनुसार समय बदल सकता है।
  • जीप सफारी बेहतर पहुंच प्रदान करती है, लेकिन कैंटर सफारी अधिक किफायती और सुरक्षित होता है।
  • टाइगर रिजर्व के यात्रा के दौरान, जंगल को बेहतर तरीका से समझने के लिए और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक गाइड को अपने साथ जरूर रखें।
  • पीक सीजन के दौरान सरिस्का टाइगर रिजर्व सफारी को ऑनलाइन प्री-बुक कराना हमेशा बेहतर होता है।
  • सरिस्का टाइगर रिजर्व क्षेत्र पर, शाम को अंधेरा होने के बाद अकेले बाहर न निकले।
  • टाइगर रिजर्व के यात्रा के दौरान किसी भी जानवर को खिलाने की कोशिश न करें, इसके साथ साथ किसी भी प्रकार के ऊंची आवाज या शोर करने वाली उपकरण या किसी अन्य चीज इस्तेमाल न करें।

सरिस्का नेशनल पार्क में होटल | Hotel in Sariska National Park

सरिस्का पैलेस होटल, सरिस्का टाइगर रिजर्व की सीमा पर स्थित है। यह राजस्थान के सबसे लोकप्रिय होटलों में से एक है। सरिस्का पैलेस होटल 120 एकड़ भूमि में फैली हुई है। साथ ही सरिस्का पैलेस होटल अपनी मेहमानों को को और सभी आधुनिक सुविधाएं प्रदान करते हैं।

शानदार पैलेस होटल फिल्म शूटिंग के लिए भी मशहूर है। इसकी इंटीरियर भव्य है। फिल्म करण अर्जुन की शूटिंग इसी महल में ‘ठाकुर दुर्जन की हवेली’ के रूप में हुई थी और करण अर्जुन का गांव अलवर जिले के भानगढ़ का एक क्षेत्र था।

सरिस्का टाइगर रिजर्व के आसपास के अन्य आकर्षक पर्यटकिय क्षेत्र

नीलकंठ मंदिर: नीलकंठ मंदिर अलवर जिले, राजस्थान भारत में राजगढ़ तहसील में एक हिंदू मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। नीलकंठ भगवान शिव को दिए गए नामों में से एक है। यह मंदिर सरिस्का टाइगर रिजर्व के पास एक सुनसान पहाड़ी में स्थित है, और केवल एक खड़ी ट्रैक से ही यहां तक पहुंचा जा सकता है। इस मंदिर का निर्माण 6ठी से 9वीं शताब्दी के बीच स्थानीय प्रतिहार सामंत परमेश्वर मथाना देव ने करवाया था।

पांडुपोल: सरिस्का टाइगर रिजर्व एक दूसरा आकर्षक पर्यटन स्थल पांडुपोल है। पांडुपोल एक प्राचीन नाम है। कहा जाता है कि पांच पांडवों में से सबसे मजबूत भीम इसी क्षेत्र में ने विशाल राक्षस हिडिंब को परास्त किया और उनके बहाने हिडिंबा का हाथ थामा। इस क्षेत्र में कठोर और सघन चट्टानों से निकलने वाला एक झरना भी है। किवदंती है कि पांडव भाई ने अपने वनवास के दौरान यहां शरण ली थी।

बैराट: बैराट जिसे पहले विराटनगर के नाम से जाना जाता था, भारत के राजस्थान के उत्तरी जयपुर जिले का एक शहर है। यह जयपुर के उत्तर में 52 किलोमीटर की दूरी पर और अलवर से 66 किलोमीटर दूर पश्चिम पर स्थित है। मत्स्य देश की राजधानी बीरनगर या बैराट थी, विराटनगर मत्स्य के राजा वीरान की राजधानी थी।

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